व्यापार करने के कुछ नियम





व्यापार कहते है कि किसी वस्तु का फैर बदल या अदला बदली लाभ के साथ किया जाए।

अल्लाह तआला ने मुसलमानों को अपने जीवन की अवश्यक्ता और पत्नि तथा बच्चों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए व्यापार करने की ओर उभारा है, ना हक किसी का माल खाने को वर्जित किया है जैसा कि अल्लाह तआला का फरमान है।

" يا أيها الذين آمنوا لاتأكلوا أموالكم بينكم بالباطل إلا أن تكون تجارة عن تراض منكم ولاتقتلوا أنفسكم , إن الله كان بكم رحيما " (سورة النساء: 29)



ऐ मूमिनों, तुम एक दुसरे का धन दौलत गलत तरीके से न खाओ, मगर तुम खुशी से व्यापार करो, और आत्महत्या न करो, बैशक अल्लाह तुम पर अत्यन्त दयालु है ”

पवित्र कुरआन में अल्लाह तआला ने नमाज़ पढ़ने के बाद व्यापार के लिए अपने दुकानों, बाज़ारो, में व्यस्त होने का आदेश दिया है। जैसा कि अल्लाह का कथन है।





" फिर जब नमाज़ पूरी हो जाए तो ज़मीन में फैल जाओ और अल्लाह का फ़ज़्ल तलाश करो, और बहुत ज़्यादा याद करते रहो, शायद कि तुम्हें सफलता प्राप्त हो जाए"

व्यापार करना बहुत ही उत्तम कमाई में से है जब की व्यापार करते समय इस्लामी शिक्षा का अनुपालन किया जाए, जैसा कि अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ी अल्लाहु अन्हुमा) से वर्णन है कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से प्रश्न किया गया कि सब से अच्छी कमाई क्या है ? तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः आदमी अपने हाथ से कमाई करे, और प्रत्येक प्रकार का व्यापार जिस में झूट की मिलावट न हो और पाप का कार्य न हो, (सही तरगीब व तरहीब )

अल्लाह तआला ने अल्लाह के रास्ते में लड़ने वाले यौधा और व्यापार के लिए यात्रा करने वाले को बराबर के स्थान पर रखा है, अल्लाह के इस कथन पर विचार करें।

" فاقرأوا ما تيسر من القرآن , علم الله أن سيكون منكم مرضى وآخرون يضربون في الأرض يبتغون من فضل الله وآخرون يقاتلون في سبيل الله " (سورة المزمل: 20)



" अब जितना आसानी से पढ़ सको कुरआन पढ़ा करो, उसे मालूम है कि तुम में कुछ बीमार होंगे, कुछ दुसरे लोग अल्लाह के अनुग्रह (रोज़ी) की खोज में यात्रा करते हैं, और कुछ और लोग अल्लाह के मार्ग में युद्ध करते हैं, "

अल्लाह तआला ने अल्लाह के रास्ते में योधा और रोज़ी कमाने वलों की प्रशंसा बयान किया है, इसी लिए अल्लाह ने व्यापार करने वाले व्यक्तियों को कुछ नियमों का पालन करने का अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को माध्यम से मुसलमानों को आज्ञा दिया हैष।

 निम्नलिखित व्यापार करने के कुछ नियम और आदाब है जिस पर अमल करने से व्यापार में अल्लाह तआला बरकत देता है।

(1)  व्यापार के लिए भी अच्छी नियत करना चाहिये,

अल्लाह तआना ने प्रत्येक कार्य पर पुण्य रखा है जबकि मानव अपने उस कार्य पर केवल अल्लाह को प्रसन्न करने की नीयत करता है, उमर बिन खत्ताब (रज़ी अल्लाहु अन्हु) से वर्णन है कि मैं ने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फरमाते हुए सुना, निः संदेह कर्मों संकल्प (हृदय की ईच्छा) पर आधारित है और प्रति व्यक्ति के संकल्प के आधार पर अच्छे या बुरे कर्मों का बदला मिलेगा ......... ( सही बुखारीः  )

यदि कोई मानव व्यापार करते समय यह नीयत करता है कि मैं इस व्यापार के माध्यम से अपने घरवालों की देख रेख और उन पर खर्च करूंगा और शक्ति के अनुसार गरीबों, अनाथों, और पड़ोसियों की सहायता करूंगा और उस ने अपने व्यापार से कमाये हेतु धन दौलत का सही प्रयोग किया तो अल्लाह उस के व्यापार में बरकत भी देगा और पुण्य भी प्रदान करेगा।

(2)  व्यापार करते समय उत्त्म व्यवहार से पेश आना चाहिये

लोगों के साथ नरमी और दियालुता करना चाहिये। किसी भी उपचार में सहनशीलता बर्ता जाए। सुंदर आचरण से मेल मिलाप करना चाहिये। लेन देन में लेगों कुछ छूट दी जाए।

जैसा कि जाबिर अब्दुल्लाह से वर्णन है कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः "अल्लाह उस व्यक्ति पर दया करे जो लोगों के साथ नरमी तथा दयालुता से पेश आता है जब वह खरीदता और बेचता है, और लोगों से अपना कर्ज़ वापस माँगता है तो अच्छे तरीके माँगता है।" (सही बुखारी)

(3)  सच्चाई और अमानत दारी से व्यापार करना चाहिये।

व्यापार विश्वास पर निर्भर करता है और इसी विश्वास के कारण भोले भाले लोग धोखा खाते हैं।

इसी लिए इस्लामिक शिक्षा बहुत ज़्यदा ज़ोर देती कि व्यापा करते समय सच बोला जाए, धोखा और काला बाज़ारी दूर रहा जाए। रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः " मुसलमान, सच्चा, अमानतदार, व्यापारी क़ियामत के दिन अल्लाह के रास्ते में शहीद होने वाले व्यक्तियों के साथ होंगे। " (सही सिल्सिलाः लेखकः अल्लामा अलबानी)

(4)  हाट में अल्लाह का ज़्यादा से ज़्यादा नाम लिया जाए।

बाज़ार में अधिक से अधिक अल्लाह का नाम लिया जाए। क्योंकि ज़्यादा तर हृदय बाज़ार में अल्लाह के ज़िक्र से गाफिल रहता है। इस हदीस पर विचार करें और अमल कर के बहुत ज़्यादा पुण्य प्राप्त करें। जिसे उमर बिन खत्ताब से वर्णन है कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः " जो बाज़ार में प्रवेश होता है तो यह दुआः " ला इलाहा इल्लल्लाह वह्दहु ला शरीक लहु, लहुल्मुल्कु व लहुल्हम्दु युह्यी व युमितु व हुव हय्युन ला यमूतु, बियदेहिल्खैर व हुव अला कुल्लि शैइन क़दीर " पढ़ता है, तो अल्लाह तआला उस के लिए हज़ार हज़ार नेकी लिख देता है और उस से हज़ार हज़ार बुराइ मिटा देता है और उस के हज़ार हज़ार पद बढ़ा देता है।" (सही अत्तरगीब व त्तरहीबः अल्लामा अल्बानी)



(5)  व्यापार के माध्यम से कमाये हुए दौलत में से गरीबों और मिस्कीनों को दान किया जाए।

अल्लाह तआला व्यापार में बहुत बरकत रखा है यदि व्यापारी सच्च और अमानतदारी के साथ व्यापार करे तो उस के लिए बहुत शुभखबर है परन्तु व्यापार करते समय शैतान के बहकावे और प्राण लोभ में आकर कुछ न कुछ अशुद्ध कार्य हो जाता है, इसी कारण रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने व्यापारी व्यक्तियों को दान करने का आदेश दिया ताकि उस का प्राश्चाताप हो सके जैसा कि कैस बिन अबी गरज़ा (रज़ी अल्लाहु अन्हु) से वर्णन है कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) एक दिन हमारे पास तशरीफ लाए और हम लोग बाज़ार में  खरीदने और बेचने में व्यस्त थे तो आप ने फरमायाः ऐ व्यापारियों, बैशक शैतान और गुनाह व्यापार के समय उपस्थित रहते हैं, तो तुम अपने खरीदने और बैचने को सद्का के माध्यम से पवित्र करो। "    (सुनन तिर्मिज़ी अल्लामा अल्बानी ने सही कहा है)

सहाबा (रज़ी अल्लाहु अन्हुम) की जीवन हमारे लिए एक उत्तम उदाहरण है जिन्हों ने गरीबों और मिस्कीनों की सहायाता कर के दान और सद्का का बेहतरीन नमुना पेश किया है। अबू बकर और उस्मान (रज़ी अल्लाहु अन्हुमा) की  पूरी जीवन लोगों की सेवा और सहायता गुज़री।

(6)  व्यापार के लिए सुबह घर से निकलना चाहिए।

सुबह के समय व्यापारिक यात्रा के लिए घर ने निकलना बहुत ही लाभदायक होता है, अल्लाह तआला सुबह के समय नकलने वालों के तिजारत में बरकत देता है और व्यापार करने वालों के माल, धन दौलत को अधिक करता है। जैसा कि रसूल रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथी सखर अल-गामिदी वर्णन करते हैं कि  रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः " ऐ, अल्लाह मेरे अनुयायियों के सबह के समय के कार्य में बहुतरी दे और नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब कोई दल शत्रूओं से युद्ध के लिए भेजते तो सुबह के समय भेजते थे, और सखर एक व्यापारिक व्यक्ति था और वह अपना व्यापारिक यात्रा सुबह के समय आरम्भ करता था, तो अल्लाह ने उसे बहुत बरकत दी और वह बहुत धन दौलत वाला हो गया।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

रोगी व्यक्तियों के लिए नमाज़ पढ़ने का तरीका

शबे क़द्र

ईमान का छटा स्तम्भः भाग्य , क़िस्मत , नसीब की अच्छाई या बुराई पर विश्वास तथा ईमान है।