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सब का मालिक एक

हमारे जहन में यह प्रश्न बार बार आता है कि ईश्वर कैसा हो ? उस के गुन कैसे हों ? वह कहाँ स्थापित हैं ?
ईश्वर एक ऐसा शब्द है जो जहन में आते ही एक बहुत ही महान वक्तित्व की कल्पना जहन में आता है जो हर वस्तु का स्वामी और पालणपोषक हो। उसने हर वस्तु को एकेले ही उत्पन किया हो, पूरे संसार को चलाने वाला वही हो, धरती और आकाश की हर चीज़ उसके आज्ञा का पालन करती हो, अपनी सम्पूर्ण विशेष्ताओं और गूनों में पूर्ण हो, जिसे खाने पिने की आवशक्ता न हो, विवाह और वंश तथा संतान की ज़रूरत न हो, तो केवल वही ज़ात उपासना के योग्य होगी और केवल वही इबादत की हक्दार होगी।
अल्लाह तआला ही केवल वह ज़ात है जो सब गूनों और विशेष्ताओं में पूर्ण है। जिस में से कुछ का ज्ञान उसने अपने दूतों और पुस्तकों के माध्यम से दिया है और कुछ अपने पास गुप्त रखा है तो उन नामों और गूनों एवं विशेष्ताओं को वैसे ही माना जाए जिस प्रकार उस का बयान हुआ है।
अल्लाह तआला की कुछ महत्वपूर्ण विशेष्ता पवित्र कुरआन की इन आयतों से स्पष्ठ होती हैं।

ऐ नबी कहो, वह अल्लाह यकता है, अल्लाह सब से निरपेक्ष है और सब उसके मुहताज हैं। न उस की कोई संतान है और न व…