संदेश

June, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

न्याय का मज़ाक

चित्र
जीवन एक बहुमुल्य और सब से प्रिय वस्तु है जिसे आज सब से अमूल्य तथा बेकार समझ लिया गया है। दुसरों की जीवन से खेलवाड़ तो सामान्य बात है शर्त है कि धनदौलत और राजनेतिक शक्ति प्राप्त हो, या मंत्रियों का साया उपलब्ध हो, सब से खेदजनक बात यह है कि हमारे देश की सब से अधिक शक्तिशाली संगठन न्यायलय और सी बी आई भी अपने कामों में बहुत प्रभावित होती है। स्वार्थी और लोभी लोग हर जगह मौजूद हैं जो सफैद को काला और काला को सफैद कर देते हैं और पीड़ितों के दुख दर्द, कष्ठ तथा परेशानियों का कोई एहसास नही करते। हमारे महान देश भारत के स्वतंत्रता प्राप्त होने के बाद से लेकर आज तक कड़ोरों न्याय का गला घोंट दिया गया है। जिस के कारण अपराध प्रत्येक दिन बढ़ता जा रहा है और लोगों के जीवन का मूल कुछ भी नहीं, सब से बड़ा रूपय्या है। आज से लग भग 26 वर्ष पहले, दिसंबर 1984 में भोपाल में हुई विश्व की बदतरीन औद्योगिक त्रासदी में 20,000 लोग मारे गये थे और 5,60,000 लोग प्रभावित हुए और उन में से 37,000 लोग स्थायी रूप से विकलांग हो गए थे। परन्तु 26 वर्ष की लंबी अवधि के बाद जब न्याय आया तो प्रत्येक न्याय प्रेमियों का हृदय रोने लगा …