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ईसा (यीशु या जीसस) अलैहिस्सलाम की जवीन कथा कुरआन की रोश्नी में

ईसा (यीशु या जीसस) अलैहिस्सलाम ( उन पर अल्लाह की शान्ती हो) को अल्लाह ने कुरआन मजीद में जो स्थान दिया है जो आदर – सम्मान दिया है बिल्कुल वह इसके अधिकार तथा ह़क़्दार हैं और इस बात की पुष्ठी बाइबल भी करता है परन्तु सेक्ड़ों बाइबल का वजूद बाइबल के असुरक्षित होने पर प्रमाणित करता है। लोगों ने अपने स्वाद के लिए पवित्र बाइबल में विभिन्न कालों में परिवर्तन करते रहे। जिस के कारण बाइबल की संख्याँ बढ़ती गई।
आज आप के सामने पवित्र कुरआन के अनुसार ईसा (यीशु ) अलैहिस्सलाम की विशेष्ताओं पर विचार करेंगे।
(1) ईसा (यीशु या जीसस) अलैहिस्सलाम ( उन पर अल्लाह की शान्ती हो) को अल्लाह ने बिना बाप के पैदा किया। अल्लाह का कथन है।
“ और जब फरिश्तों ने कहा ऐ मरयम , अल्लाह तुझे अपने एक आदेश की खुशखबरी देता है, उसका नाम मसीह ईसा बिन मरयम होगा, दुनिया और आखिरत में प्रतिष्ठित होगा, अल्लाह के निकटवर्ती बन्दों में गिना जाएगा, लोगों से पालन में (पैदाईश के बाद ही) भी बात करेगा और बड़ी उम्र को पहुंच कर भी और वह एक नेक व्यक्ति होगा। यह सुनकर मरयम बोली, पालनहार, मुझे बच्चा केसे होगा ? मुझे किसी मर्द ने हाथ तक नही लगाया। …