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रमज़ान के महीने के में की जाने वाली इबादतें- अराधना

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रमज़ान करीम की बरकत और पवितर्ता से हम उसी समय लाभ उठा सकते हैं जब हम अपने बहुमूल्य समय का सही प्रयोग करेंगे, इस कृपा, माफी वाले महिने में सही से अल्लाह तआला की पुजा- अराधना करेंगे जिस तरह से प्रिय रसूल मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अल्लाह तआला की पुजा- अराधना किया है। वह इबादतें करेंगे जिसके करने से हमें पुण्य प्राप्त हो और हमारी झोली पुण्य से भर जाए और हमारा दामन पापों से पाक साफ हो जाए और उन कामों से दुर रहा जाए जो इस पवित्र महीने की बरकत तथा अल्लाह की कृपा, माफी से हमें महरूम ( वंचित) कर दे।
रमज़ान के महिने की सब से महत्वपूर्ण इबादत रोज़ा (ब्रत) है जिसे उसकी वास्तविक हालत से रखा जाए और उन कामों तथा कार्यों से दूर रहा जाए जो रोज़े को भंग ( खराब) कर दे। रोज़े रखने के लिए सब से पहले रात से ही या सुबह सादिक़ से पहले ही रोज़े रखने की नीयत किया जाए। इस लिए कि जो व्यक्ति रात में ही रोज़े की नीयत न करेगा, उस का रोज़ा पूर्ण न होगा। मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का कथन है " जो व्यक्ति रात ही से रोज़े की नीयत न करे, उस का रोज़ा नही। " ( अल- मुहल्लाः इब्नि हज़्म, अल-इस्तिज…

पुण्य से अपने झोली को भरने का महीना रमज़ान

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रमज़ान का महीना वह पवित्र तथा बर्कत वाला महीना है जिस में अल्लाह तआला ने भलाई और लोगों के लिए कल्याण का काम करने वालों के लिए पुण्य और पापों से मुक्ति ही रखा है। यह वह महीना है जिस में जन्नत ( स्वर्ग) के द्वार खोल दिये जाते हैं तथा जहन्नम (नरक) को द्वार बन्द कर दिये जाते है, सरकश जिन और शैतान को जकड़ दिया जाता है और अल्लाह की ओर से पुकारने वाला पुकारता है , हे ! नेकियों के काम करने वालों , पुण्य के कार्यों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लो, और हे ! पापों के काम करने वालों , अब तो इस पवित्र महीने में पापों से रुक जा, और अल्लाह तआला नेकी करने वालों को प्रति रात जहन्नम ( नरक ) से मुक्ति देता है। (सहीह उल जामिअ , अलबानी)
रमज़ान के महिने की सब से महत्वपुर्ण इबादत रोज़ा (ब्रत) है जिसे अरबी में सियाम कहते हैं जिस का अर्थ होता है," रुकना " अर्थातः सुबह सादिक से लेकर सुर्य के डुबने तक खाने – पीने तथा संभोग से रुके रहना, रोज़ा कहलाता है। रमज़ान के महीने का रोज़ा हर मुस्लिम , बालिग , बुद्धिमान पुरुष और स्री पर अनिवार्य है, रोज़ा इस्लाम के पांच खम्बों में से एक खम्बा है। जिसे हर मुस्लिम को हृद…