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January, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गणतंत्र दिवस

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आज 26 जनवरी ऐतिहासिक दिन है जिस दिन प्रत्येक भारतीय के हृदय में देश भक्ति की लहरें उठता है। यही वह दिन है जब जनवरी 1930 में लाहौर में पंडित जवाहर लाल नेहरु ने तिरंगा फहराया था और स्वतंत्र भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की घोषणा की थी।
26 जनवरी 1950 वह दिन था जब भारतीय गणतंत्र और इसका संविधान प्रभावी हुए। यही वह दिन था जब 1965 में हिन्दी को भारत की राजभाषा घोषित किया गया।
इस अवसर के महत्व के दर्शान के लिए हर वर्ष गणतंत्र दिवस पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, और राजधानी, नई दिल्ली में राष्ट्र‍पति भवन के समीप रायसीना पहाड़ी से राजपथ पर गुजरते हुए इंडिया गेट तक और बाद में ऐतिहासिक लाल किले तक शानदार परेड का आयोजन किया जाता है।
इस लिए हम आज गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर अपने सब भारतीयों को शुभ कामनाए देते हैं और देश की प्रगति और तरक्की के लिए दुआ करते हैं। सब देशवासियों से बिन्ती करते हैं कि भारत की प्रगति, उत्पादन, तरक्की और देश की छवी को सुन्दर से अतिसुन्दर करने के लिए मिल जुल कर काम करें और उन लोगों का बाइकाट करें जो हमारे देश को बांटने का काम करते हैं और भारत की प्र…

सफर का महीना ( अपशकुन)

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इस्लामिक महीनों में से एक महिने का नाम सफर है जो केलन्डर सूची के अनुसार दुसरा महीना है। इस महीने को सफर इस लिए कहा जाता है क्यों कि इस्लाम से पहले अरब वासियों दुसरे समुदाय पर आक्रमण करते थे और सब कुछ लूट लेते और कुछ भी न छोड़ते थे, इसी लिए इस महीने को सफर कहा जाता था और अरब वासियों इस महीने में दो बड़े अप्राध में ग्रस्त थे।
पहलाः इस महीने को अपने स्वार्थ के कारण आगे – पीछे कर लेते थे।
दुसराः इस महीने को मानते थे।

इस्लाम ने पूर्व अरबवासियों के दोनों कार्यों का बहुत ज्यादा खंडन किया है और एक साफ सुथ्रा मन्त्र अल्लाह पर विश्वास पेश किया है जो हर प्रकार से पवित्र और लाभदायक है।

पहलाः इस्लाम से पहले अरब वासियों सफर के महीने को अपने स्वार्थ के कारण आगे – पीछे कर लेते थे जिस महीने को अल्लाह तआला ने आदर- सम्मान वाला बनाया था, उस में पूर्व अरबवासी उलट फेर कर देते थे। अल्लाह ने उसी उलट फेर की निति को अशुद्ध करार किया। सफर का महीना वर्ष के बारा महीने में से दुसरा महीना है। अल्लाह तआला के पास उन में से चार महीने आदर ( हुरमत वाले) हैं। जैसा कि अल्लाह तआला का कथन है , ” वास्तविकता यह है कि महीनों क…

मुस्लिम का व्यवहार

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इस्लामिक जीवन में अच्छे आचार तथा व्यवहार बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसी कारण इस्लाम ने अच्छे आचरण और स्वभाव व्यक्तियों को उच्च स्थान पर स्थापित किया है। उत्तम व्यवहार एवं सुन्दर आचार एक आदर्श समाज की निर्माण के लिए ईंट का काम करती है और सुन्दर संस्कृति की निर्माण के लिए ठोस नीव है। अच्छे व्यवहार की ओर सर्व नबियों, रसूलों ने आमंत्रण किया है।
इस लिए इस्लाम ने अपने अनुयायियों को प्रत्येक उत्तम व्यवहार और स्वभाव का शिक्षण दिया और अशुद्ध आचार से दूर रहने का आदेश दिया। यही कारण कि मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने खुले शब्दों में कह दिया कि मेरे नबी बना कर भेजे जाने का लक्ष्य ही उत्तम आचार का प्रचार करना है। मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का कथन है, " انما بعثت لأتمم مكارم الأخلاق "
निःसंदेह मुझे केवल इसी लिए भेजा गया कि मैं उत्तम आचार की ओर बुलाता रहूँ " ( मुस्नद अहमद )

जब मानव का आचार अच्छा होगा तो उसका ईमान भी सम्पूर्ण होगा और उस के जन्नत में प्रवेश होने की संभावना भी अधिक होगी जैसा कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का कथन है,
وعن أبي هريرة رضي الله عنه أن رسول ال…