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जन्नत में सब से प्रथम प्रवेश होने वाले व्यक्ति

अल्लाह ताआला ने स्वर्ग की सुन्दरता , उस में पाई जाने वेली सुख-शान्ति और उस में पाई जाने वाली अति स्वदिस्ट वस्तुओं के कारण उसे बहुत से नामों से याद किया है। जैसे , सलामती का घर, हमैशा रहने वाला ठेकाना, नेमतों से पुर्ण जन्नत, अमनो सुकून का स्थान, सच्चा बैठक, न खत्म होने वाला घर आदि जन्नत के आठ द्वार होंगे, प्रत्येक द्वार की चौराई चालिस वर्ष की मसाफत के बराबर होगी। जो व्यक्ति जीवन में जिस नेक कर्म पर ज़्यादा अमल करता था वह उस द्वार से प्रवेश करेगा जैसा कि सही बुखरी में अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णन है। أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال : منأنفقزوجينفيسبيلالله ، نودي من أبواب الجنة : يا عبد الله هذا خير ، فمن كان من أهل الصلاة دعي من باب الصلاة ، ومن كان من أهل الجهاد دعي من باب الجهاد ، ومن كان من أهل الصيام دعي من باب الريان ، ومن كان من أهل الصدقة دعي من باب الصدقة . فقال أبو بكر رضي الله عنه : بأبي وأمي يا رسول الله ، ما على من دعي

जन्नत (स्वर्ग) क्या है ?

जन्नत (स्वर्ग) उस हसीन और अति सुन्दर, मनोरम, हृदय ग्राही, ऐश- इशरत से भरी हुई, सुख-चैन, राहत और सुकून और अम्नो शान्ति का स्थान है, जिसे अल्लाह तआला ने अपने प्रियतम दासों और वास्तविक भक्तों और आज्ञापालन करने वाले दासों , अल्लाह की उपासना करने वाले बन्दों, भलाई की ओर निमन्त्रण करने वाले और बुराई तथा अशुद्ध कार्यों से मना करने वाले, और अल्लाह के अधिकार के साथ लोगों के अधिकार को अदा करने वाले बन्दों के लिए बनाया है। जन्नत हमैशा रहने वाला वह स्थान है जो कभी समाप्त न होगा, जिस के लिए एक मूमिन हमैशा कोशिश करता है, उसे प्राप्त करने के लिए बहुत पर्यत्न करता है, अपने मानव आवश्यक्ता को कुचल देता है, अभीलाशओं को लगाम लगा देता है, शैतान से दुश्मनी मोल लेता है, जीवन में हजारों परेशानियाँ तथा संकट झेलता है ताकि अल्लाह की बहूमुल्य जन्नत को प्राप्त कर सके, जैसा कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः قال النبي صلى الله عليه وسلم: " من خاف ادلج ومن ادلج بلغ المنزل. ألا إن سلعة الله الغالية , ألا إن سلعة الله الغالية , ألا إن سلعة الله الجنة-"(سنن الترمذي – صحيح الجامع للألباني) नबीसल्लल्ल…