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अनुचित और अवैध व्यापार

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व्यापार यदि इस्लामिक शिक्षा के अनुसार किया जाए तो वह उपासना और ईबादत के स्थान पर माना जाता है और मानव के पवित्र कमाई में शुमार होता है और उसके कमाई करने के लिए प्रत्येक प्रकार के प्रायास पर पुण्य मिलेता है परन्तु व्यापार में इस्लामिक आदेशों का उलंघन किया गया तोवह कमाई उस आदमी के लिए परेशानी के कारण बनेगा और मानव की उस कमाई पर बहुत ज़्यादा अल्लाह के पास प्रश्न किया जाएगा। जैसा कि नबी(सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः
"لَا تَزُولُ قَدَمَا عَبْدٍ يَوْمَ الْقِيَامَةِ حَتَّىيُسْأَلَ عَنْ عُمُرِهِ فِيمَا أَفْنَاهُ وَعَنْ عِلْمِهِ فِيمَ فَعَلَ وَعَنْمَالِهِ مِنْ أَيْنَ اكْتَسَبَهُ وَفِيمَ أَنْفَقَهُ وَعَنْ جِسْمِهِ فِيمَأَبْلَاهُ "أخرجه الترمذي وقَالَ: هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ
क़ियामत के दिन किसी भी व्यक्ति के दोनो पाँव अपने स्थान से नही हरकत करेंगे यहाँ तक कि उस से उस के आयु के प्रति प्रश्न किया जाएगा कि किन चीज़ों में लगाया और उस के ज्ञान के हेतू प्रश्न किया जाऐगा कि उसने अपने ज्ञान के अनुसार अमल किया कि नहीं, और उस के धन-दौलत के बारे में प्रश्न किया जाऐगा कि उसने धन-दौलत क…

व्यापार करने के कुछ नियम

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व्यापार कहते है कि किसी वस्तु का फैर बदल या अदला बदली लाभ के साथ किया जाए।
अल्लाह तआला ने मुसलमानों को अपने जीवन की अवश्यक्ता और पत्नि तथा बच्चों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए व्यापार करने की ओर उभारा है, ना हक किसी का माल खाने को वर्जित किया है जैसा कि अल्लाह तआला का फरमान है।
" يا أيها الذين آمنوا لاتأكلوا أموالكم بينكم بالباطل إلا أن تكون تجارة عن تراض منكم ولاتقتلوا أنفسكم , إن الله كان بكم رحيما " (سورة النساء: 29)


“ ऐ मूमिनों, तुम एक दुसरे का धन दौलत गलत तरीके से न खाओ, मगर तुम खुशी से व्यापार करो, और आत्महत्या न करो, बैशक अल्लाह तुम पर अत्यन्त दयालु है ”
पवित्र कुरआन में अल्लाह तआला ने नमाज़ पढ़ने के बाद व्यापार के लिए अपने दुकानों, बाज़ारो, में व्यस्त होने का आदेश दिया है। जैसा कि अल्लाह का कथन है।

فإذا قضيت الصلاة فانتشروا في الأرض وابتغوا من فضل الله واذكروا الله كثيرا لعلكم تفلحون"(سورة                -   الجمعة: 10 )


" फिर जब नमाज़ पूरी हो जाए तो ज़मीन में फैल जाओ और अल्लाह का फ़ज़्ल तलाश करो, और बहुत ज़्यादा याद करते रहो, शायद कि तुम्हें सफलता प्राप्त हो ज…