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महिलाओं का स्थान

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इस्लाम ने महिलाओं को जो अधिकार दिया है, जो आदर–सम्मान किया है पूरी दुनिया वाले उस जैसा दे ,यह तो दूर की बात है, उस के निकट भी नहीं पहुंच सकते बल्कि अपने लोभ तथा स्वाद के कारण दिखाने के लिए कुछ शौर मचाते, सड़क जाम करते और कुछ प्रेस कान्फरेन्स करके महिलाओं के अधिकारों का रोना रोते, और एक दुसरे पर कीचर उछालते और महिला दिवस मना कर खामूश हो जाते हैं और कुच्छ खबर रिपोरटर भी कुच्छ सुनी सुनाइ बात या समाज में भैली हुई खराबी को देख कर एक लम्बा चौरा आरटिकल लिख देते हैं और इस्लाम पर आरोपों की लाइन लगा देते हैं और अपनी बेवक़ुफी को सब पर प्रकट करते हैं।
इस्लामिक धर्मग्रंथों में महिलाओं और पुरुषों के बीच कोई अन्तर नही बल्कि प्राकृतिक शारीरिक बनावट के अनुसार कुच्छ वस्तु को पुरुषों के लिए वर्जित किया गया हैं। तो कुच्छ वस्तु को महिलाओं के लिए वर्जित किया गया हैं और महिलाओं को जीवन के प्रत्येक मोड़ पर एक सुन्दर स्थान दी गई है जो उस के आदर तथा सम्मान को अधिक अच्छा करता हैं।
निः संदेह महिला का एक महान स्थान है और इस्लाम ने उसे उसके योग्य स्थान पर स्थापित किया है और जीवन के हर मोड़ पर एक सुरक्षक …