ईमान का दुसरा स्तम्भ: अल्लाह के फरिश्तों पर विश्वास तथा ईमान है।

अल्लाह के फरिश्तों पर विश्वास तथा ईमान का अर्थात यह कि इस बात पर कठोर विश्वास और आस्था हो कि अल्लाह तआला ने फरिशतों को मनुष्य से पहले उतपन किया है। अल्लाह तआला ने फरिशतों की रचना प्रकाश से किया है। वह गुप्त रहते हैं, वह दिखते नहीं, परन्तु कभी कभी वह नबियों और रसूलों को दिखते हैं, फरिशते अल्लाह के नेक बन्दे हैं जो अल्लाह की उपासना और विभिन्न कार्यों में व्यस्त रहते हैं, वह अल्लाह की अवज्ञाकारी नही करते, वह बुराइ नही करते, उन्हे खाने-पीने की अवश्यक्ता नहीं, विवाह की ज़रूरत नही, बल्कि वह अल्लाह की इबादत में लगे रहते हैं, जो काम अल्लाह ने उसे दिये हैं उसी में ग्रस्त रहते हैं।

उनकी कुछ महत्वपूर्ण विशेष्ता यह हैं।
(1) बहुत शक्तिशाली और बड़े शरीर वाले होते हैं।
जैसाकि अल्लाह तआला ने नरक की रक्षक फरिशते के बारे में फरमाया है।
ياأيها الذين آمنوا قوا أنفسكم وأهليكم نارا وقودها الناس والحجارة – عليها ملائكة غلاظ شداد لايعصون الله ما امرهم ويفعلون مايؤمرون " - التحريم: 6

“ ऐ लोगों जो ईमान लाऐ हो, बचाओ अपने आप को और अपने घरवालों को उस अगनी से जिसका एंधन इन्सान और पत्थर होंगे, जिस पर कठोर स्वभाव के सख्त पकड़ करनेवाले फरिश्ते नियुक्त होंगे, जो कभी अल्लाह के आदेश की अवहिलना नहीं करते, और जो आदेश भी उन्हें दिया जाता है उसका पालन करते हैं।”

इसी तरह मोहम्मद (अलैहिस्सलातु वस्सलाम) ने फरमाया ,, मुझे अनुमति दी गइ है कि मैं अल्लाह के अर्श को उठाने वाले फरिश्तो में से एक फरिशेते के बारे में बताऊं, उसके कान की लौ से गर्दन तक की दूरी सात सौ वर्ष के दूरी के बराबर है।

(2) फरिश्ते परोंवाले होते हैं।
अल्लाह ने फरिश्तों को पर (भुजाएं) दिया है। किसी फरिश्ते को एक पर दिया है , किसी फरिशेते को दो पर दिया है, किसी को तीन , किसी को चार पर दिया है। फरिशत के उच्च स्थान के अनुसार पर दिये गऐ हैं। जैसा कि अल्लाह तआला ने फरमया।
" الحمد لله فاطر السموات والأرض جاعل الملائكة رسلا أولي أجنحة مثنى وثلث وربع يزيد في الخلق ما يشاء " ( فاطر: 1)
अर्थातः "तारीफ अल्लाह ही के लिए है जो आकाशों और धरती का रचनक है और फरिश्तों को संदेष्वाहक नियुक्त करने वाला है। एसे फरिश्ते जिनको दो, दो और तीन,तीन और चार,चार भुजाएं हैं। वह अपनी सरेष्टी सनरचना में जैसी चाहता है। अभिर्वर्दन करता है।"
जिब्रील अलैहिस्सलाम को छे सौ पर थे। जैसाकि " आइशा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) वर्णन करती हैं कि प्रिय नबी (अलैहिस्सलातु वस्सलाम) ने जिब्रील को उसकी वास्तविक रूप में देखा और उनको छे सौ पर थे। उन में से एक पर उफुक को छाया हुआ था। "

(3) फरिश्ते की संख्या बहुत हैं।
अल्लाह तआला के सिवा कोई नही जानता कि फरिश्तों की संख्या क्या हैं। अल्लाह तआला ने खुले शब्दों में स्पष्ट कर दिया
وما يعلم جنود ربك إلا هو" - المدثر: 31 "
"َََ और तेरे रब की सेनाओं को स्वयं उसके सिवा कोई नही जानता है। "

(4) फरिश्ते बहुत नेक होते हैं।
अल्लाह तआला ने फरिश्तों से भुल-चूक को हटा दिया है। वह बहुत नेक होते हैं। उन्से कभी भी कोई गलती और अपराध नही होता। अल्लाह तआला ने फरिश्तों के प्रति फरमाया।
بأيدي سفرة - كرام بررة " - عبس: 15
इस आयत का अर्थात यह कि “ उच्च कोइ के हैं, पवित्र हैं ”
फरिश्ते हमेशा अल्लाह के आज्ञाकारी करते हैं अवज्ञा नहीं करते हैं। अल्लाह तआला का कथन है।
لايعصون الله ما امرهم ويفعلون ما يؤمرون " - التحريم 6
इस आयत का अर्थात यह कि फरिश्ते कभी भी अल्लाह के आदेश की अवहिल्ना नही करते और जो आदेश भी उन्हें दिया जाता है उसका पालन करते हैं।

(5) अल्लाह ने फरिश्तों को रूप धारने की शक्ति दी हैं।
अल्लाह ने फरिश्तों को रूपधारन की शक्ति दी हैं जिस से वह आवश्यक्ता के अनुसार रूपधारण कर लेते हैं। जैसा कि इब्राहीम अलैहिस्सलाम के पास इन्सानी रूप में आऐ. नबी(अलैहिस्सलातु वस्सलाम) के पास इन्सानी रूप में आते थे।

कुच्छ कार्य जो फरिश्ते अन्जाम देते हैं।
(1) अल्लाह फरिश्तों को अपना दुत्त और एल्ची बनाता है।
अल्लाह तआला और मनुष्य के बीच फरिश्ते माध्यम का काम करते हैं। अल्लाह तआला नबियों और सन्देष्टाओं के पास पैगाम लेकर फरिश्तों को भेजते थे। उन में से जिब्रील अलैहिस्सलाम नबियों के पास अल्लाह का सन्देश लेकर आते थे।

(2) कुच्छ फरिश्तें अल्लाह के अर्श (सिंहासन) को उठाए हुए हैं।
अल्लाह ने कुच्छ फरिश्तों को जिम्दारी दे रखी कि वह अल्लाह के अर्श को उठाए रखे जैसा कि अल्लाह तआला ने फरमाया है।
" الذين يحملون العرش ومن حوله " - غافر: 7
अर्थातः “ जो अल्लाह के अर्श को उठाऐ हुए हैं और उसके इर्द गिर्द वाले ”
और क़ियामत के दिन अल्लाह के अर्श ( सिंहासन) को आठ फरिश्ते उठाऐ हुए होंगे, अल्लाह तआला का इर्शाद है।
" ويحمل عرش ربك فوقهم يومئذ ثمانية " - الحاقة: 17
अर्थः “ और आप के रब के अर्श (सिंहासन) को उस दिन आठ फरिश्ते उठाऐ हुए होंगे।”

(3) कुच्छ फरिश्तों को अल्लाह ने मनुष्य की रक्षा के लिए नियुक्त किया हैं
अल्लाह तआला अपने बन्दों और दासों पर बहुत दयावान है। इसी लिए अल्लाह ने मनुष्य की रक्षा के लिए फरिश्तों को नियुक्त किया है जो घटनाओं , संक्कटों और भुकंपों में उन लोगों की रक्षा करते हैं जिन का जीवन बाकी है। जैसा कि अल्लाह ताआला का कथन है।
له معقبات من بين يديه ومن خلفه يحفظونه من أمر الله " - الرعد: 11
अर्थः “ हर व्यक्ति के आगे और पीछे उसके नियुक्त किये गए निरक्षक लगे हुए हैं जो अल्लाह के आदेश से उसकी देख भाल कर रहे हैं।”

(4) कुच्छ फरिश्तें मनुष्य के कर्मों को लिखते रहते हैं।
अल्लाह तआला ने बहुत सारे फरिश्तों को इन्सानों के कर्मों को लिखने के लिए नियुक्त किया है जो इन्सान से होने वाले हर कर्म को लिख लेते हैं चाहे वह अच्छा हो या बुरा । पवित्र क़ुर्आन में अल्लाह का कथन है।
إذ يتلقى المتلقيان عن اليمين وعن الشمال قعيد – ما يلفظ من قول إلا لديه رقيب عتيد " - ق: 18
अर्थः दो लिखने वाले उसके दांऐ और बांऐ बैठे हर चीज़ अंकित कर रहे हैं। कोई शब्द उसके मुक्ख से नही निकलता जिसे सुरक्षित करने के लिए एक उपस्थित रहने वाला निरक्षक मौजूद न हो,

(5) कुच्छ फरिश्तें धार्मिक पोरोग्राम में उपस्थित रहनेवाले व्यक्तियों पर शान्ती की प्रार्थना करते हैं। उनका नाम लिख लेते हैं

(6 ) अल्लाह ने कुच्छ फरिश्तों को मनुष्य का प्राण निकालने के लिए नियुक्त किया हैं। जो ठीक समय पर बिना जलदी और विलंब के उस व्यक्ति का प्राण निकालते हैं जिस के मृत्यु का समय आ गया हो। अल्लाह तआला ने इसी चीज़ को कहा है।
حتى إذا جاء أحدكم الموت توفته رسلنا وهم لايفرطون " - الأنعام: 61
इस आयत का अर्थातः यहां तक कि जब तुम में से किसी के मौत का समय आ जाता है तो उसके भैजे हुए फरिश्ते उसकी जान निकाल लेते हैं और अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में तनिक कोताही नही करते "

इस के सिवा अल्लाह तआला ने बहुत सारे फरिश्तों को दुसरे बहुत सा कार्य दिया है जो वह बिना चूँ चरा के अन्जाम देते हैं।

फरिश्तों पर विश्वास तथा ईमान रखने से हमें कुच्छ लाभ प्राप्त होते हैं।
(1) अल्लाह तआला की महानता और उसके महान शक्ति का ज्ञान मिलता है।
(2) हमें पता चलता है कि अल्लाह तआला ने हमारी निगरानी के लिए अपने खास दासों( फरिश्तों) को नियुक्त किया है जिस पर हम अल्लाह तआला का शुक्र अदा करना चाहिये और उसके आज्ञा का अधिक पालण करना चाहिये।
(3) इस से हमारे हृदय में फरिश्ते के लिए प्रेम पैदा होता है क्योंकि फरिश्ते अल्लाह की उपासना बहुत अच्छे ढ़ंग से करते हैं और हमारी रक्षा करते और हमारी क्षमा के लिए अल्लाह से प्रार्थाना करते हैं।

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