जहन्नम (नरक) की तबाही



प्रत्येक प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है और हमारे प्रिय नबी पर अल्लाह की ओर से सलामती और शान्ति उतरे।

अल्लाह तआला ने दुनिया की रचना की और दुनिया में लोगों को बसाया और बसाने के बाद समय समय में अपने दूतों को दुनिया में भेजते रहे जो लोगों को भलाई और पुण्य के कार्य करने पर जन्नत की शुभ सूचना देते थे और बुराई, अशुद्घ व्यवहार और दुष्कर्म एवं अल्लाह की अवज्ञा करने पर जहन्नम की चेतावनी देते थे। उन नबियों में सब से अन्तिम नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)  के प्रति बता दिया कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को सारे दुनिया वालों के लिए भेजा गया है ताकि नेक कर्मों पर आप लोगों को शुभ खबर दे और बुरे कार्य से चेतावनी दें। जैसा कि अल्लाह का फरमान है।
" تبارك الذي نزل الفرقان على عبده ليكون للعالمين نذيرا " (الفرقان: 1)
बहुत ही बरकत वाला है वह जिस ने यह फ़ुरक़ान (क़ुरआन) अपने बन्दों पर अवतरित किया ताकि सारे जहां वालों के लिए सावधान कर देनेवाला हो। (सूरः फ़ुरक़ानः 1)
यह दुनिया अमलस्थल है और आख़िरत बदले का घर है। यह दुनिया की जीवन ख़त्म होने वाली है और आख़िरत की जीवन सदैव है।
इस कारण हम इस संसारिक जीवन में इस क़दर व्यस्त न हों कि आख़िरत के सदैव जीवन को भूल जाए, क्योंकि हम सब को यह दुनिया छोड़ कर जाना है। जिस ने इस दुनिया में अच्छे कर्म किया और बुराई से अपने आप को सुरक्षित रखा तो वही व्यक्ति सफल होगा। जैसा कि अल्लाह का फ़रमान है।
" كل نفس ذائقة الموت و إنما توفون أجوركم يوم القيامة فمن زحزح عن النار وأدخل الجنة فقد فاز، وما الحياة الدنيا الا متاع الغرور"-[سورة آل عمران: 185]
प्रत्येक जीव मृत्यु का मज़ा चखनेवाला है और तुम्हें तो क़ियामत के दिन पूरा-पूरा बदला दे दिया जाएगा। अतः जिसे आग (जहन्नम) से हटाकर जन्नत में दाख़िल कर दिया गया, वह सफल रहा। रहा सांसारिक जीवन, तो वह माया-सामग्री के सिवा कुछ भी नहीं (सूरहः आले इमरानः 185)
अल्लाह तआला ने प्रत्येक मानव के लिए दो घर तैयार किया है और उसके कर्म के अनुसार उसे उचित घर में दाख़िल करेगा। जैसा कि हदीस में विवरण हुआ है।
अब्दुल्लाह बिन उमर(रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से वर्णित है कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः जब तुम में से कोई देहांत पाता है तो सुबह शाम उस पर उस का घर पेश किया जाता है। यदि वह जन्नत वासियों में से है तो जन्नत उस के ऊपर पेश किया जाता है और यदि वह जहन्नम वासियों में से है तो उस पर जहन्नम पेश किया जाता है। फिर कहा जाता है, यह तुम्हारा ठेकाना है जिस पर तुम क़ियामत के दिन उठाए जाओगे।  (सही मुस्लिमः  )
इस लिए अल्लाह तआला ने इस जहन्नम से दूर रहने और अपने परिवार वालों को जहन्नम से सुरक्षित रखने पर उत्साहित किया है।
يا أيها الذين آمنوا قوا أنفسكم وأهليكم نارا وقردها الناس و الحجارة عليها ملائكة غلاظ شداد لايعصون الله ما أمرهم ويفعلون ما يؤمرون" ( سورة التحريم: 6 )
अर्थः ऐ ईमान लानेवालो! अपने आपको और अपने घरवालों को उस आग से बचाओ जिसका ईधन मनुष्य और पत्थर होंगे, जिसपर कठोर स्वभाव के ऐसे बलशाली फ़रिश्ते नियुक्त होंगे जो उस में वह अल्लाह की आदेशों की अवज्ञा नहीं करेंगे और वे वही करेंगे जिसका उन्हें आदेश दिया जाएगा।  (66-सूरह तहरीमः6)
عن أبي هريرةَ ؛ قال : لما أُنزلتْ هذه الآيةُ : { وَأَنْذِرْ عَشِيرَتَكَ الأَقْرَبِينَ } [ الشعراء : 214 ] دعا رسولُ اللهِ صلَّى اللهُ عليهِ وسلَّمَ قريشًا . فاجتمعوا . فعمَّ وخصَّ . فقال يا بني كعبِ بنِ لؤيّ ! أنقِذُوا أنفُسَكُم منَ النارِ . يا بني مرةَ بنِ كعبٍ ! أنقذُوا أنفُسَكُمْ منَ النارِ . يا بني عبدِ شمسٍ ! أنقذُوا أنفسَكُم من النارِ . يا بني عبدِ منافٍ ! أنقذُوا أنفُسكُم من النارِ . يا بني هاشمٍ ! أنقذُوا أنفسكُم منَ النارِ . يا بني عبدِالمطَّلبِ! أنقذُوا أنفُسكمْ منَ النارِ . يا فاطمةُ ! أنقذِي نفسَكِ منَ النارِ . فإني لا أملكُ لكُم منَ اللهِ شيئًا . غيرَ أنَّ لكُم رحِمًا سأَبُلُّها ببِلالِها. (صحيح مسلم: 204 )
रसूल(सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दावत की शुरूआत से ले कर जीवन के अन्तिम सांसों तक लोगों को इस नरक (जहन्नम) से बचाते रहे, उन्हें जन्नत की ओर बुलाते रहे, चूंनांचे सर्व प्रथम अपने परिवार और संबन्धियों को जहन्नम से डराया। जैसा कि अबू हुरैरा(रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है कि जब यह आयत नाज़िल हुईः
و أنذر عشيرتك الأقربين" (سورة الشعراء: 214)
और अपने निकटतम नातेदारों को सचेत करो।  (सूरहः अश्शुअराः 214)
तो रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने क़ुरैश को एक स्थान पर एकात्र किया। तो सब लोग एकात्र हुए। तो रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने सार्वजनिक और विशेष ढ़ंग से सम्बोधित किया। तो फरमायाः ऐ बनू कअब बिन लूवय! अपने आप को जहन्नम(नरक) से सुरक्षित कर लो, ऐ बनू मुर्रा बिन कअब! अपने आप को जहन्नम(नरक) से सुरक्षित कर लो,  ऐ बनू अब्दे शम्स! अपने आप को जहन्नम(नरक) से सुरक्षित कर लो, ऐ बनू अब्द् मनाफ! अपने आप को जहन्नम(नरक) से सुरक्षित कर लो, ऐ बनू हाशिम! अपने आप को जहन्नम(नरक) से सुरक्षित कर लो, ऐ बनू अब्दुल्मुत्तिलब! अपने आप को जहन्नम(नरक) से सुरक्षित कर लो, ऐ फ़ातिमा! तू अपने आप को जहन्नम से सुरक्षित कर लो, बेशक मैं अल्लाह के सामने कुछ भी शक्ति नहीं रखता,बस, मैं दुनिया में सम्बन्धि होने के कारण अपने ह़क्क़ को अदा करता रहूंगा। (सही मुस्लिमः 204)  
इसी तरह नबी (सल्लल्लाहु अलैहि सल्लम) सब लोगों को जहन्नम से सुरक्षित रखने के लिए बहुत ज़्यादा प्रयास करते थे. बहुत ज़्यादा मेहनत करते थे और इस कोशिश को रसूल ने एक उदाहरण के माध्यम से समझाया है।
مثَلي كمثَلِ رجلٍ استوقدَ نارًا. فلمَّا أضاءَتْ ما حولَها جعل الفراشُ وهذه الدَّوابُّ الَّتي في النَّارِ يقعْنَ فيها.وجعلَ يحجزهُنَّ ويغلِبنَهُ فيتقحَّمْنَ فيها.قال:فذلِكُمْ مثَلي ومثَلُكم. أنا آخذُ بحُجَزِكم عن النَّارِ. هلمَّ عن النَّارِ. فتغلِبوني تقَحَّمونَ فيها-(+%D9%85%D9%88%D9%82%D8%B9+%D8%A7%D9%84%D8%AF%D8%B1%D8%B1+%D8%A7%D9%84%D8%B3%D9%86%D9%8A%D8%A9+-+%D8%A7%D9%84%D9%85%D9%88%D8%B3%D9%88%D8%B9%D8%A9+%D8%A7%D9%84%D8%AD%D8%AF%D9%8A%D8%AB%D9%8A%D8%A9+-+%D9%85%D9%86+%D8%AD%D8%AF%D9%8A%D8%AB+%D8%A3%D8%A8%D9%88+%D9%87%D8%B1%D9%8A%D8%B1%D8%A9   صحيح مسلم-: 2284)
रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)  ने फरमायाः मेरी मिसाल एक ऐसे व्यक्ति की तरह है जो आग जलाया तो उसके आस पास प्रकाश छा गई, तो  पतिंगे उस आग में गिरने लगे और वह व्यक्ति उन पतिंगों को आग से दूर रखने का प्रयास करने लगा परन्तु वे पतिंगे उस पर छा कर उस में गिरने लगे फिर आप ने फरमायाः तो मेरी मिसाल और तुम्हारी मिसाल इसी प्रकार है। मैं तुम को जहन्नम से दूर रखने की अन्थक कोशिश करता हूँ परन्तु तुम लोग मुझ पर गालिब आ कर उस में दाखिल हो रहे हो। (सही मुस्लिमः 2284)
रसूल(सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने क्या ही उत्तम उदाहरण दी है कि लोग इस जहन्नम में छलांग लगा रहें हैं, क्योंकि अल्लाह तआला ने जहन्नम को अति उत्साहित वस्तुओं से सुसज्जित कर दिया है। जिस कारण लोग उसमें गिरते जा रहे हैं। दुनियावालों को लोभाने वाली चीज़ों से जहन्नम को सजा दिया गया है।
जहन्नम क्या है ? 
इस में किन लोगों का आवास होगा ?
यह सरकशों का घर होगा, यह अप्राधियों का निवास होगा, यह अत्याचार कों का आवास होगा।, चीखों पुकार का स्थान होगा। यहां दहकती हुई आग होगी, शोला भड़काती अगनी होगी,  यहां ओढ़ना बिछौना, खाना पीना आग ही आग होगी, इस आग को भड़काने के लिए कोयला, लकड़ी और पेट्रोल इत्यादि की आवश्यक्ता न होगी बल्कि कुफ्फ़ार एवं मुश्रेकीन , पापियों तथा अवज्ञाकारों की टोली होगी।
इसी लिए अल्लाह ने इसे बहुत से नामों से याद किया है। ताकि इसके यातनाओं, परेशानियों, कष्ठों और तक्लिफों से लोगों को सूचित किया जाए।
उस के मश्हूर नामों में से है, जहन्नम, हलाकत का घर, भड़कती हुई आग,न बाकी रखती और न छोड़ती बल्कि चेहरे को झुलसाने वाली आग, तोड़फोड़ करने वाली है, इत्यादि
जहन्नम बहुत ही भयंकर स्थान होगा, उस में यातनाएं अत्यंत कष्ठनीय होगा। जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती, इस हदीस पर ग़म्भीरता से विचार करें जो जहन्नम के और अत्यन्त कष्टदायक और दर्दनाक और उसके महान होने को प्रामाणित करता है।
जैसा कि अबदुल्लाह बिन मस्उद (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णन है कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः
يؤتَى بجَهنَّمَ يومئذٍ لَها سبعونَ ألفَ زمامٍ . معَ كلِّ زمامٍ سبعونَ ألفَ ملَكٍ يجرُّونَها.  (صحيح مسلم: 2842) 
क़ियामत के दिन जहन्नम को लाया जाएगा, उसके सत्तार हज़ार लगाम होंगे और हर लगाम के साथ सत्तार हज़ार फरिश्ते होंगे जो उस लगाम को खींच रहे होंगे,  (सही मुस्लिमः 2842 )
जब अत्याचारों ,पापियों और अल्लाह के साथ कुफ्र एवं शिर्क करने वालों को जहन्नम की ओर ले जाया जाएगा तो जहन्नम उन्हें दूर से देख कर ही चीखेगी, चिल्लाएगी जैसा कि अल्लाह का फरमान हैः
अर्थः  वास्तविक बात यह है कि ये लोग, उस घड़ी को झुठला चुके हैं।- और जो उस घड़ी को झुठलाए, उस के लिए हमने भड़कती हुई आग जुटा रखी है।– वह जब दूर से इनको देखेगी तो ये उसके प्रकोप और जोश की आवाजें सुन लेंगे। और जब ये हाथ-पाँव बँधे उसमें एक तंग जगह ठूँसे जाएँगे तो अपनी मौत को पुकारने लगेंगे, (उस समय उनसे कहा जाएगा) आज एक मौत को नहीं, बहुत-सी मौतों को पुकारो । (सूरः अल-फ़ुरक़ानः 11-14)
जहन्नम के सात द्वार होंगे जिस में से जहन्नम वासी दाख़िल किये जाएंगे।  जैसा कि अल्लाह तआला का कथन है।
و إن جهنم لموعدهم أجمعين – لها سبعة أبواب لكل باب منهم جزء مقسوم- (سورة الحجر:43)
और निश्चय ही जहन्नम ही का ऐसे समस्त लोगों से वादा है- उसके सात द्वार है। प्रत्येक द्वार के लिए एक ख़ास हिस्सा होगा।" (15- सूरह अलहिज्रः 44)
जहन्नम की गहराईः
जहन्नम बहुत ज़्यादा गहरी होगी जिस की कल्पना भी नहीं किया जा सकता है, जैसा कि हदीस में वर्णन हैः इस हदीस पर गम्भीरता से विचार करें।
كنا مع رسولُ اللهِ صلَّى اللهُ عليه وسلَّمَ: إذ سمع وجبةً. فقال النبيّ:ُ صلَّى اللهُ عليه وسلَّمَ:" تدرون ما هذا ؟ " قال، قلنا: اللهُ ورسولُه أعلمُ. قال: " هذا حجرٌ رُمِيَ به في النارِ منذ سبعينَ خريفًا. فهو يهوي في النارِ الآنَ، حتى انتهى إلى قعرِها". وفي رواية: " هذا وقع في أسفلِها، فسمعتُم وَجبتَها". (صحيح مسلم: 2844)
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णन हैः हम लोग नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास बैठे हुए थे, एक बहुत ही भयंकर आवाज़ आई तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमायाः क्या तुम लोग जानते हो कि यह कैसी आवाज़ थी? तो हमने कहा, अल्लाह और उसके रलूल अधिकतम जानते हैं। तो आप ने फरमायाः यह एक पत्थर जो जहन्नम में सत्तर वर्ष पहले फेंका गया था तो वह अभी तक जहन्नम में गिरता रहा यहां तक कि उसकी तह को पहुंचा है। (दुसरी रिवायत में इस प्रकार है) वह पत्थर उसकी गहराइ में पहुंचा है तो तुम लोगों ने उस के गिरने की आवाज़ सुनी है। (सही मुस्लिमः 2844)
जहन्नम किय ही बुरा ठेकाना है ?
जहन्नम क्या ही बुरा ठेकाना होगा, क्या ही परेशानी का स्थल होगा, क्या ही अपमानजनक स्थान होगा? जब जहन्नमियों को जहन्नम की ओर ले जाया जाएगा, जहन्नम में डाला जाएगा तो जहन्नम के दारोगे उन्हें अपमान करते हुए कहेंगे। जिस दृश्य को क़ुरआन ने इस प्रकार बयान किया है।
وَسِيقَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِلَىٰ جَهَنَّمَ زُمَرًا حَتَّىٰ إِذَا جَاءُوهَا فُتِحَتْ أَبْوَابُهَا وَقَالَ لَهُمْ خَزَنَتُهَا أَلَمْ يَأْتِكُمْ رُسُلٌ مِنْكُمْ يَتْلُونَ عَلَيْكُمْ آيَاتِ رَبِّكُمْ وَيُنْذِرُونَكُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَٰذَا قَالُوا بَلَىٰ وَلَٰكِنْ حَقَّتْ كَلِمَةُ الْعَذَابِ عَلَى الْكَافِرِينَ - قِيلَ ادْخُلُوا أَبْوَابَ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا فَبِئْسَ مَثْوَى الْمُتَكَبِّرِينَ – (سورة الزمر-39: 72)
जिन लोगों ने इनकार किया, वे गिरोह के गिरोह जहन्नम की ओर ले जाए जाएँगे, यहाँ तक कि जब वे वहाँ पहुँचेगे तो उसके द्वार खोल दिए जाएँगे और उसके प्रहरी उनसे कहेंगे, क्या तुम्हारे पास तुम्हीं में से रसूल नहीं आए थे जो तुम्हें तुम्हारे रब की आयतें सुनाते रहे हों और तुम्हें इस दिन की मुलाक़ात से सचेत करते रहे हों ?  वे कहेंगे, क्यों नहीं (वे तो आए थे)।" किन्तु इनकार करने वालों पर यातना की बात सत्यापित होकर रही, कहा जाएगा, जहन्नम के द्वारों में प्रवेश करो। उसमें सदैव रहने के लिए।" तो बहुत ही बुरा ठिकाना है अहंकारियों का! (अज़्ज़ुमरःसूरह3972)
जब जन्नत वासियों को जन्नत में और जह्न्नम वासियों को जहन्नम में दाखिल कर दिया जाएगा तो इसके बाद किसी को मौत नहीं आऐगी बल्कि जन्नत वासी हमेशा जन्नत में होंगे और जहन्नम वासी हमेशा जहन्नम में होंगे सिवाए जिन्हें अल्लाह अपने कृपा से जहन्नम से निकाल कर जन्नत में दाखिल करेगा। इस हदीस पर विचार करें।
قال ابو سعيد الخدري قال: رسول الله صلى الله عليه وسلم: يُؤتى بالموتِ كهيئةِ كبشٍ أملحَ، فينادي منادٍ: يا أهلَ الجنَّةِ، فيشرئبون وينظرون، فيقولُ: هل تعرفون هذا ؟ فيقولون: نعم، هذا الموتُ، وكلُّهم قد رآه. ثم ينادي: يا أهلَ النارِ، فيشرئبون وينظرون، فيقولُ: هل تعرفون هذا ؟ فيقولون: نعم، هذا الموتُ، وكلُّهم قد رآه، فيذبحُ. ثم يقولُ: يا أهلَ الجنَّةِ خلودٌ فلا موتَ، ويا أهلَ النارِ خلودٌ فلا موتَ. ثم قرأ: {وَأَنْذِرْهُمْ يَوْمَ الْحَسْرَةِ إِذْ قُضِيَ الْأَمْرُ وَهُمْ فِي غَفْلَةٍ-وهؤلاء في غفلةِ أهل الدنيا-وَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ}. (صحيح البخاري: 4730)
अबू सईद कहते हैं कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः मौत को सुन्दर चितकब्रे दुंबे के रुप में लाया जाएगा, तो एक पुकारने वाला पुकारेगा, ऐ जन्नत वासियों! तो जन्नत वासी अपने सर उठा कर झांकेंगे और देखेंगे तो पुकारने वाला कहेगा, क्या तुम लोग इसे पहचानते हो? तो वे जवाब देंगे, हाँ, यह मौत है, और हर एक ने इसे देखा है, फिर वह पुकारेगा, ऐ जहन्नम वासियों! तो जहन्नम वासी अपने सर उठा कर झांकेंगे और देखेंगे तो पुकारने वाला कहेगा, क्या तुम लोग इसे पहचानते हो? तो वे जवाब देंगे, हाँ, यह मौत है और हर एक ने इसे देखा है, तो उसे ज़बह कर दिया जाएगा और फिर कहा जाएगा, ऐ जन्नतवासियों! हमेशा हमेश के लिए जन्नत में विश्राम करो, अब मौत नहीं, और ऐ जहन्नमवासियों! हमेशा हमेश के लिए जहन्नम में यातना झेलो, अब मौत नहीं, फिर यह आयत तिलावत फरमाईः “ उन्हें पश्चाताप के दिन से डराओ,जबकि मामले का फ़ैसला कर दिया जाएगा, और उनका हाल यह है कि वे ग़फ़लत में पड़े हुए है और वे ईमान नहीं ला रहे है।”   (19-सूरहः मरयमः 39)
जहन्नम वासी विभिन्न प्रकार की यातनाओं, परेशानियों और कष्टों में ग्रस्त होंगे। जहन्नम में सब से कम यातना वाला व्यक्ति भी अपने आप को सब से सख्त अज़ाब वाला व्यक्ति समझेगा। जैसा कि हदीस में विवरण हैः नुमान बिन बशीर (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः
" إن أهون أهل النار عذابا يوم القيامة رجل على أخمص قدميه جمرتان يغلي منهما دماغه كما يغلي المرجل المقمقم" - (صحيح البخاري وصحيح مسلم)
बेशक क़ियामत के दिन सब से हलका अज़ाब एक व्यक्ति को दिया जाएगा कि उस के दोनों पाँव में आग के जूतें पहनाये जाएंगे, जिस कारण उस का दिमाग़ इस प्रकार खौलेगा जिस तरह पानी खौलता है।- (सही बुखारीः 6562, सही मुस्लिमः 213)
जहन्नम की आग दुनिया की आग से सत्तर गुना अधिक होगी जैसा कि हदीस में वर्णन है।
जहन्नमियों का वस्त्र भी आग ही होगा जैसा कि अल्लाह तआला का फरमान है।
  هَٰذَانِ خَصْمَانِ اخْتَصَمُوا فِي رَبِّهِمْ فَالَّذِينَ كَفَرُوا قُطِّعَتْ لَهُمْ ثِيَابٌ مِنْ نَارٍ يُصَبُّ مِنْ فَوْقِ رُءُوسِهِمُ الْحَمِيمُ- يُصْهَرُ بِهِ مَا فِي بُطُونِهِمْ وَالْجُلُودُ- وَلَهُمْ مَقَامِعُ مِنْ حَدِيدٍ- كُلَّمَا أَرَادُوا أَنْ يَخْرُجُوا مِنْهَا مِنْ غَمٍّ أُعِيدُوا فِيهَا وَذُوقُوا عَذَابَ الْحَرِيقِ- (سورة الحج-22: 22)
ये दो विवादी हैं, जो अपने रब के विषय में आपस में झगड़े। अतः जिन लोगों ने कुफ्र किया उनके लिए आग के वस्त्र काटे जा चुके है। उनके सिरों पर खौलता हुआ पानी डाला जाएगा - इससे जो कुछ उनके पेटों में है, वह पिघल जाएगा और खालें भी-और उनके लिए (दंड देने को) लोहे के गुर्ज़ होंगे - जब कभी भी घबराकर उससे निकलना चाहेंगे तो उसी में लौटा दिए जाएँगे और (कहा जाएगा)"चखो दहकती आग की यातना का मज़ा!"  (22-सूरः अल-हज्जः 22)
दुसरी आयत में भी अल्लाह तआला ने कुछ इस प्रकार बयान किया है।
وَتَرَى الْمُجْرِمِينَ يَوْمَئِذٍ مُقَرَّنِينَ فِي الْأَصْفَادِ - سَرَابِيلُهُمْ مِنْ قَطِرَانٍ وَتَغْشَىٰ وُجُوهَهُمُ النَّارُ - لِيَجْزِيَ اللَّهُ كُلَّ نَفْسٍ مَا كَسَبَتْ  إِنَّ اللَّهَ سَرِيعُ الْحِسَابِ– (سورة ابراهيم-14: 51)
और उस दिन तुम अपराधियों को देखोगे कि ज़ंजीरों में जकड़े हुए है - उनके परिधान तारकोल के होंगे और आग उनके चहरों पर छा रही होगी,-ताकि अल्लाह प्रत्येक जीव को उसकी कमाई का बदला दे। निश्चय ही अल्लाह जल्द हिसाब लेने वाला है।  (14-सूरः इबराहीमः 51)
जहन्नमियों का ओढ़ना और बिछौना ही आग होगा ताकि कोई पल भी आराम व शान्ति से न रहे बल्कि प्रत्येक छण ही यातनाओं और कष्ट में ग्रस्त रहें, हमेशा चीखते चिल्लाते रहें। जैसा कि अल्लाह ने उन की इस स्थिति के प्रति सूचित किया है।
لَهُمْ مِنْ جَهَنَّمَ مِهَادٌ وَمِنْ فَوْقِهِمْ غَوَاشٍ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي الظَّالِمِينَ ٤١- (سورة الاعراف-7: 41)
उनके लिए बिछौना जहन्नम का होगा और ओढ़ना भी उसी का। अत्याचारियों को हम ऐसा ही बदला देते है। (41-सूरः अल-आराफः (41)
जहन्नम वासी विभिन्न प्रकार की यातनाओं और परेशानियों में लिप्त होंगे। किसी के चमड़े को जलाया जाएगा तो किसी की आन्त रोंदी जाऐंगी तो किसी के चेहरे को झुलसाया जाएगा। और न जाने किस किस प्रकार का अज़ाब दिया जाएगा। प्रत्येक प्रकार के अज़ाब में ग्रस्त होंगे, भूकु पियास की शिद्दत से तड़प रहे होंगे , भूक-पियास से जान निकल रही होगी। उस के बाद जो खानपान के लिए उन्हें दिया जाएगा, तो उनके परेशानी और तक्लीफ में अधिकपन ही होगा। जैसा कि अल्लाह ने खबर दिया है।
إِنَّ شَجَرَتَ الزَّقُّومِ-طَعَامُ الْأَثِيمِ-كَالْمُهْلِ يَغْلِي فِي الْبُطُونِ-كَغَلْيِ الْحَمِيمِ-(سورة الدخان-44: 46)
निस्संदेह ज़क़्क़ूम का वृक्ष-गुनहगार का भोजन होगा- तेल की तलछट जैसा, वह पेटों में खौलता होगा-जैसे गर्म पानी खौलता है।  (44- सूरः अद्दुखानः 46)
ज़क़्क़ूम (थोहड़) की कड़वाहट और बदबू बहुत ज़्यादा होगी जिस का दुनिया के किसी चीज़ से उदाहरण नहीं दे सकते बल्कि कुछ अनुमान लगा सकते हैं जो अनुमान से भी कहीं ज़्यादा होगी। जिस के लिए इस हदीस पर विचार करें।
لو أن قطرة من الزقوم قطرت في دار الدنيا لأفسدت على أهل الأرض معايشهم. فكيف بمن يكون طعامه. (صحيح الجامع الصغير: الشيخ الألباني)
यदि ज़क़्क़ूम (थोहड़) की एक बूंद दुनिया में गिर जाए तो धरती वासियों की पूरी जीवन नष्ट हो जाएगी। तो जिन का भोजन ही यही होगा तो उनकी क्या हालत होगी ?-  (सहीहुल जामिअ अस्स़गीरः शैख़ अल्बानी)
تَصْلَىٰ نَارًا حَامِيَةً-تُسْقَىٰ مِنْ عَيْنٍ آنِيَةٍ-لَيْسَ لَهُمْ طَعَامٌ إِلَّا مِنْ ضَرِيعٍ-لَا يُسْمِنُ وَلَايُغْنِي مِنْ جُوعٍ– (سورة الغاشية-88: 7)
दहकती आग में प्रवेश करेंगे-खौलते हुए स्रोत से पिएँगे-उनके लिए कोई खाना न होगा सिवाय एक प्रकार के ज़री के,- जो न पुष्ट करे और न भूख मिटाए।  (88-सूरह-ग़ाशियाः7)
كَمَنْ هُوَ خَالِدٌ فِي النَّارِ وَسُقُوا مَاءً حَمِيمًا فَقَطَّعَ أَمْعَائَهُمْ (سورة محمد-47: 15)
क्या वे उन जैसे हो सकते है, जो सदैव आग में रहनेवाले है और जिन्हें खौलता हुआ पानी पिलाया जाएगा, जो उनकी आँतों को टुकड़े -टुकड़े करके रख देगा (47- सूरह-मुहम्मदः 15)
وَاسْتَفْتَحُوا وَخَابَ كُلُّ جَبَّارٍ عَنِيدٍ-مِنْ وَرَائِهِ جَهَنَّمُ وَيُسْقَىٰ مِنْ مَاءٍ صَدِيدٍ- يَتَجَرَّعُهُ وَلَا يَكَادُ يُسِيغُهُ وَيَأْتِيهِ الْمَوْتُ مِنْ كُلِّ مَكَانٍ وَمَا هُوَ بِمَيِّتٍ وَمِنْ وَرَائِهِ عَذَابٌ غَلِيظٌ– (سورة ابراهيم-14: 17)
उन्होंने फ़ैसला चाहा और प्रत्येक सरकश-दुराग्रही असफल होकर रहा वह जहन्नम से घिरा है और पीने को उसे कचलोहू का पानी दिया जाएगा-जिसे वह कठिनाई से घूँट-ट करके पिएगा और ऐसा नहीं लगेगा , कि वह आसानी से उसे उतार सकता है, और मृत्यु उस पर हर ओर से चली आती होगी, फिर भी वह मरेगा नहीं। और उसके सामने कठोर यातना होगी (सूरह इबराहीम-14: 17)
كَلَّا إِنَّهُمْ عَنْ رَبِّهِمْ يَوْمَئِذٍ لَمَحْجُوبُونَ-ثُمَّ إِنَّهُمْ لَصَالُو الْجَحِيمِ–(سورة المطففين: 16)
हर गीज़ नहीं, अवश्य ही वे उस दिन अपने रब से ओट में होंगे- फिर वे भड़कती आग में जा पड़ेगे (सूरह मुत़फ़्फ़ेफ़ीनः 16)
इतने सख्त अज़ाब और यातना में जहन्नम वाले ग्रस्त होंगे जिस के कारण वह बहुत ज़्यादा रोएंगे जिसा का हदीस में वर्णन है जिस हदीस को अब्दुल्लाह बिन क़ैस वर्णन करते हैं कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) फरमाते हैं।
إن أهل النار ليبكون حتى لو أجريت السفن في دموعهم جرت، و إنهم ليبكون الدم يعني مكان الدمع- (السلسلة الصحيحة: 1679- الشيخ الألباني)
रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः बेशक जहन्नम वासी इस मात्रा में रोइंगे कि यदि उनके आंसू के पानी में कश्ती चलाइ जाए तो कश्ती चल पड़ेंगी, और वह लोग पानी के आंसू की जगह खून के आंसू रोऐंगे।  (सिल्सिला अस्सहीहाः शैख़ अल्बानीः 1679)
जहन्नम में दाखिल करने वाले कर्मः  
अल्लाह का कुफ्र किया जाए और उसका इन्कार किया जाए, अल्लाह की इबादत में किसी दुसरे को साझिदार तथा भगिदार बनाया जाए, रसूलों को झुटलाया जाए और उनका इन्कार किया जाए, अल्लाह और उसके रसूलों का अपमान किया जाए, और अल्लाह और उसके रसूल की शान गुस्ताखी की जाए,
किसी की अमानत में ख्यानत करना, बेहयाइ ,झूट बोलना, किसी से हसद और करना, रिश्तेदारों से सम्बन्ध तोड़ना, किसी को धोखा देना, किसी पर अत्याचाक करना, अल्लाह की दी हुई नेमतों पर गर्व और अहंकार करना, अल्लाह और उसके रसूलों की नाफरमानी एवं अवज्ञा करना, अनिवार्य वस्तुओं को छोड़ना और अवैध वस्तुओं पर अमल करना, अल्लाह की नाफरमानी में मानव की आज्ञा पालन किया जाए, जादू टोना सीखना और सिखाना, माता-पिता की अवज्ञा करना और उन की देख रेख करना, उन के साथ दुर्व्यवहार करना, आत्महत्या करना, किसी दुसरे मानव को बिना हक्क के क़त्ल करना, किसी का धनदौलत ना हक खाना, और दुसरे पाप गुनाह है जो जहन्नम में प्रवेश होने का कारण बनता है सिवाए कि बन्दा अपने गुनाह पर शर्मिन्दा हो कर अल्लाह से तौबा और क्षमा मांगे तो अल्लाह की चाहत पर निर्भर है, अल्लाह चाहे तो उसे माफ कर दे या चाहे तो उसे सज़ा दे परन्तु अल्लाह के साथ शिर्क करने वाले को अल्लाह कभी क्षमा नहीं करेगा यदि उसने अपनी मृत्यु से पूर्व तौबा न कर ले।

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